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धानुक समाज का सामाजिक उत्थान कैसे हो सकता है

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धानुक समाज के अंदर विश्वास की सख्त कमी है जिसकी वजह से हमेशा हम आपसी बिखराव की कगार पर होते है। हमारे अंदर जो आत्मविश्वास की कमी है वह प्राकृतिक है। क्योंकि ऐसी प्रवृती किसी दूसरे समाज में नहीं पायी जाती है। दुसरो की बातो को जल्दी ग्रहण करना भी बड़ी खामी है, दूसरे के बहकावे में जल्दी आ जाना, जिसका नतीजा हम आज तक भुगत रहे है। हमारी एकता ही हमारा उद्धार कर सकती है। जब तक हम लाखो की संख्या में एक नहीं होंगे हमारे समाज की भलाई नहीं हो सकती है। हमे आपस में सामंजस्य बनाना होगा, हमारी आपस की सहमति भी जरुरी है, हमारे समाज के लोगो का विश्वास भी जरुरी है। मेरी चिंता इस बात को लेकर भी है हम कितने असहनशील है, की हमे किसी एक व्यक्ति का सन्देश सही नहीं लगता है तो हम एक दूसरे पर दोषारोपण से भी बाज नहीं आते है। हमारे कुछ सवाल है अपने समाज के कर्ता-धर्ता से जो निम्नलिखित है: क्या हम ऐसे समाज को आगे ला पाएंगे? क्या हमारे समाज की समझ एक तरह की हो पायेगी? क्या हम कभी एक हो पाएंगे? क्या हमारी मानसिकता एक होगी समाज को आगे लाने के लिए? इस बात को हमारे समाज के लिए समझना पड़ेगा जिस समाज में 80-90% लोग आज

दरभंगा एक दिवश्य धरना धानूक समाज का

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सभी धानुक समाज के समाजसेवियों को हार्दिक बधाई कल सम्पन्न हुए एक दिवसीय महासम्मेलन के लिए। जो आ पाये उनका हार्दिक अभिनन्दन, जो नहीं आ पाये किसी कारणवश उनको आगे आने वाले आंदोलन के लिए हार्दिक शुभकामना। कल कार्यकर्ताओं द्वारा उठाये गए मुद्दों को लेकर समाज के सभी समाजसेवियों की एक मत से यही राय रही की इस आंदोलन को हमे अपने समाज के निचले तबके तक ले जाना है जो इन सब बातो से वंचित है। हमे समाज के उस तीसरी जमात के लोगो को भी इस मुहीम का हिस्सा बनाना है जो कही छूट रहे है अपने सामाजिक सरकारो से। उनके उत्थान के लिये समाज के सभी बुद्धिजीवियों से आग्रह किया गया की आप सभी अपनी अपनी तरफ से कोशिश करे उन्हें आगे लाने की और उन्हें समाज के मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रेरित करे। धानुक समाज का पिछड़ापन ही उसकी बड़ी समस्या रही है लेकिन इसका मतलब यह नही है की हम अपने समाज को उसके हाल पर छोड़ कर आगे बढ़ जाये। जब तक हमारे समाज का हर एक व्यक्ति इस बात को नही समझ लेता तब तक हमे यह लड़ाई जारी रखनी है। हम आज तक ठगे गए है और हमे अपने समाज के अंदर बैठे विभीषण को पहचानना होगा और उन्हें अपने इस कार्य में बाधा पहुँ

दरभंगा एक दिवश्य धरना धानूक समाज का

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सभी धानुक समाज के समाजसेवियों को हार्दिक बधाई कल सम्पन्न हुए एक दिवसीय महासम्मेलन के लिए। जो आ पाये उनका हार्दिक अभिनन्दन, जो नहीं आ पाये किसी कारणवश उनको आगे आने वाले आंदोलन के लिए हार्दिक शुभकामना। कल कार्यकर्ताओं द्वारा उठाये गए मुद्दों को लेकर समाज के सभी समाजसेवियों की एक मत से यही राय रही की इस आंदोलन को हमे अपने समाज के निचले तबके तक ले जाना है जो इन सब बातो से वंचित है। हमे समाज के उस तीसरी जमात के लोगो को भी इस मुहीम का हिस्सा बनाना है जो कही छूट रहे है अपने सामाजिक सरकारो से। उनके उत्थान के लिये समाज के सभी बुद्धिजीवियों से आग्रह किया गया की आप सभी अपनी अपनी तरफ से कोशिश करे उन्हें आगे लाने की और उन्हें समाज के मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रेरित करे। धानुक समाज का पिछड़ापन ही उसकी बड़ी समस्या रही है लेकिन इसका मतलब यह नही है की हम अपने समाज को उसके हाल पर छोड़ कर आगे बढ़ जाये। जब तक हमारे समाज का हर एक व्यक्ति इस बात को नही समझ लेता तब तक हमे यह लड़ाई जारी रखनी है। हम आज तक ठगे गए है और हमे अपने समाज के अंदर बैठे विभीषण को पहचानना होगा और उन्हें अपने इस कार्य में बाधा पहुँ

एसटी दर्जा देने संबंधी विधेयक को मिली मंजूरी

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« PREV NEXT » एसटी दर्जा देने संबंधी विधेयक को मिली मंजूरी नई दिल्ली। सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह नहीं चाहती कि देश में आरक्षण के लिए एक ही जाति को विभिन्न राज्यों में अलग-अलग दर्जा प्राप्त हो और इसके लिए वह राज्यों के साथ विचार-विमर्श के लिए एक राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाएगी। जनजातीय मामलों के मंत्री किशोर चंद्र देव ने राज्यसभा में संविधान [अनुसूचित जनजातिया] आदेश [संशोधन] विधेयक पर हुई चर्चा के जवाब में यह बात कही। चर्चा के बाद सदन ने इस विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। लोकसभा में यह पहले ही पारित हो चुका है। विभिन्न जातियों का दर्जा तय करने के लिए एक व्यापक विधेयक लाने की विभिन्न दलों की माग पर मंत्री ने कहा कि हम अभी ऐसा करने की स्थिति में नहीं हैं। इसके लिए मंडल आयोग जैसा कोई आयोग गठित करने के विपक्ष के सुझाव पर उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार इस पर विचार करेगी। देव ने यह भी स्पष्टीकरण दिया कि मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनाव को ध्यान में रख कर यह विधेयक नहीं लाया गया है। संविधान संशोधन विधेयक के जरिए मणिपुर के छह समु

S.t कि मांग धानूक समाज का

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आज दरभंगा के बहादुरपुर प्रखण्ड के विभिन्न गाँव में बैठक हुई,जिला से गोपाल मण्डल, कपिलेश्वर महतो,रामदयाल मंडल,और सुन्दर मंडल जी ने भाग लिया बहेरी प्रखंड के दो गांव महुली और सुसारी मे आज बैठक हुआ जिसमें 50 लोग शामिल हूए और इस प्रखंड से 15 गाड़ी पोलो मैदान आयेगा 29 जनबरी 2016 को दरभंगा पोलो मैदान मे धरना प्रदर्सन कि तैयारी ।

बिहार धानुक समाज कि दिल्ली मिंटींग

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इतिहास की पहली दिल्ली में धानुक महासभा की बैठक हुई, जिसमे हमारे धानुक समाज के हर वर्ग के लोगो ने अपनी सहभागिता दर्ज़ करायी। ये इतिहास की पहली ऐसी कोई बैठक दिल्ली में हुई। और इस बैठक को पहली मीटिंग का इतिहास में दर्ज़ होने के साथ साथ धानुक भाइयों की जागरूकता को देख कर धानुक भाई बधाई के पात्र है। धानुक भाईओं की तरफ से कुछ सुझाव भी दिए गए जिनमे कुछ महत्वपूर्ण है और जिनको आप इनमे से किसी को भी दरकिनार नहीं कर सकते है। जितने भी धानुक भाईओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज़ करायी उनमे से सबका एक ही विचार था की अब और नहीं हमे इस आंदोलन को अगले स्तर तक ले कर जाना है। और हम इन सबके लिए हमारे प्रदेश अध्यक्ष के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया और हमे उन्हें हर तरीके से उनका समर्थन करना चाहिए और करेंगे। दिल्ली के मीटिंग में उपस्थित सदस्यों द्वारा एक मत से निम्नलिखित बातो पर जोर डालने की बात कही गयी: १) हमे आपस में लोगो में जागरूकता फैलानी है २) हमे आपस में ही अपने जानने वालो धानुक भाईओं को इस मुहीम से जोड़ना है। ३) हमे आपस में संदेशो का आदान प्रदान करते रहना चाहिए। ४) हमे हर मीटिंग में अपने पीछे के किये कार्यों क

वर्तमान सरकार कर रहा है अंदेखा धानुक समाज को

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1 एक तरफ माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने गुजरात में पटेल के आरक्षण की मांग को इस आधार पर न्यायोचित ठहराया है कि देश के दूसरे राज्यों में उनके समकक्ष समुदायों को आरक्षण मिल रहा है तो वहीँ दूसरी तरफ बिहार के धानुक समाज (जो बिहार छोड़कर देश के सभी राज्यों में अनुसूचित जाति/जन जाति में है, यहाँ तक कि नेपाल में भी जन जाति में है|) के मांग को ख़ारिज कर देना कहाँ तक न्यायोचित है ? 2 एक तरफ सरकार ने कहा है कि किसी जाति विशेष को अनुसूचित जाति/जन जाति में शामिल करने का मामला भारत सरकार के क्षेत्राधिकार में आता है तो स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि कैसे लोहार एवं नइया जाति को अनुसूचित जनजाति और तांती एवं खतबे जाति को अनुसूचित जाति की श्रेणी में रखा है ? संबंधित अभिलेख अनुलग्न है| मैं अपील करता हूँ कि इस सम्बन्ध में अपनी राय बेझिझक रखें| कमेन्ट करें | शेयर करें | आपकी राय के आधार पर ही आगे की सोचेंगें | अक्सर मुझे लोग फोन कर वर्तमान परिदृश्य में किस गठ्वंधन को समर्थन/विरोध की बात करते हैं | आज मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि अबतक ना तो मैं किसी के समर्थन में हूँ और ना ही विरोध में | समाज