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अब भी जागो धानुक समाज!

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अब भी जागो धानुक समाज! धानुक समाज एक लंबे अरसे से इस भ्रम में जी रहा है कि कोई न कोई नेता, कोई मसीहा आएगा और उसका उद्धार कर देगा। पर यह सोच केवल आत्मप्रवंचना है। मैं वर्षों से देख रहा हूँ — पहले भी कई संस्थाएँ थीं जो धानुक समाज के नाम पर चल रही थीं, और आज भी कई संगठन नए चेहरे लेकर सामने आ रहे हैं। लेकिन यदि आप गहराई से देखेंगे तो पाएँगे कि चाहे पुराने हों या नए, दोनों का मकसद एक ही है — व्यक्ति विशेष का लाभ, न कि समाज का सशक्तिकरण। पहले की संस्थाएँ समाज को शासन और प्रशासन में भागीदारी दिलाने का सपना दिखा कर धोखा देती रहीं। अब की संस्थाएँ दो-चार सतही कार्य करके उन्हें सोशल मीडिया पर दिखा कर वाहवाही बटोरती हैं। यह भी एक नए दौर का छलावा है, जो समाज को गुमराह कर रहा है। असलियत यह है कि आज धानुक जाति का कोई वास्तविक नेता नहीं है, कोई प्रभावशाली संस्था नहीं है, और इसका मुख्य कारण खुद समाज की निष्क्रियता और आपसी बिखराव है। जब समाज का कोई व्यक्ति संकट में होता है — किसी बच्ची के साथ दुष्कर्म होता है, कोई मौत के मुहाने पर होता है, किसी गरीब परिवार की मदद की ज़रूरत होती है, ...तो कोई...

जो समाज एक #हैशटैग ट्रेंड नहीं करा सकता, उनसे एकता की क्या उम्मीद?

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जो समाज एक #हैशटैग ट्रेंड नहीं करा सकता, उनसे एकता की क्या उम्मीद? कुछ वर्ष पूर्व हमने सोशल मीडिया पर एक मुहिम शुरू की थी – #शहीद_रामफल_मंडल जी को पहचान दिलाने की। लेकिन दुख की बात यह रही कि इस मुहिम को हमने नहीं, समाज के ही कुछ लोगों ने "शशिधर और बिरेंद्र धानुक की निजी पहल" मान लिया। विशेषकर समाज के ही कुछ गुटबाज धानुकों ने इस पहल में भाग नहीं लिया, और एक जरूरी कोशिश असफल रह गई। अब समय बदल चुका है। सोशल मीडिया की ताकत असीमित है। आज अगर कोई हैशटैग ट्रेंड में आ जाए, तो नेता से लेकर अभिनेता, मीडिया से लेकर सरकार तक सब उसे नोटिस करते हैं। कई बार मजबूरी में उन्हें उस मुद्दे पर बोलना भी पड़ता है। आइए, इस अगस्त में एक बार फिर कोशिश करें। #शहीद_रामफल_मंडल को ट्विटर (अब एक्स) पर ट्रेंड कराएं। उनकी शहादत को वो राष्ट्रीय सम्मान दिलाएं, जिसके वे हकदार हैं। सोशल मीडिया की ताकत के कुछ सच्चे उदाहरण: 1. हाथरस कांड (2020): एक दलित युवती के साथ गैंगरेप और उसकी हत्या को प्रशासन ने दबाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सोशल मीडिया पर जब हैशटैग #JusticeForManisha ट्रेंड करने लगा, तो देश भर म...

लोकतंत्र पर तेज़ाब: सीवान की सड़कों पर न्याय को ज़िंदा जलाया गया था

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🇮🇳 भारत का कर्ज़ — कैसी स्थिति है? 1. कुल सरकारी कर्ज़ (2024 तक): भारत की सरकार पर कुल कर्ज़ लगभग 150 लाख करोड़ रुपये (GDP का लगभग 80%) है। इसमें दो प्रकार का कर्ज होता है: आंतरिक कर्ज (Internal Debt): भारत के ही नागरिकों, बैंकों और संस्थाओं से लिया गया कर्ज। बाहरी कर्ज (External Debt): अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों, विदेशी निवेशकों और सरकारों से लिया गया कर्ज। 2. बाहरी कर्ज की स्थिति: भारत का बाहरी कर्ज कुल GDP का लगभग 18% है (जो काफी संतुलित है)। भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार (foreign reserves) है जिससे वो किसी भी समय यह कर्ज चुका सकता है। भारत ने कभी भी डिफॉल्ट (कर्ज़ ना चुका पाने) की स्थिति का सामना नहीं किया। 3. शर्तें और उद्देश्य: यह कर्ज नियंत्रित ब्याज दरों पर लिया जाता है। इसका इस्तेमाल बुनियादी ढांचे, तकनीकी विकास, ऊर्जा, रेलवे, स्वास्थ्य और शिक्षा में किया जाता है। भारत को विश्वसनीय और क्रेडिट रेटिंग वाला देश माना जाता है।

Shahid ramfal mandal, शाहिद रामफल मंडल

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Facebook link भारत मां के र्गव था, "वह हैं" मैथिली गरीबी-गोकुल मंडल का संतान। मात्र 19 वर्ष के उम्र में दे दी देश के खातिर प्राण, हंसकर चुमा फांसी का फंदा, दिया प्राणों का बलिदान, ऐसे थे हमारे वीर योद्धा शहीद रामफल मंडल जी महान। जंग खा गए क्यों इतिहास के पन्ने, क्यों नहीं मिला उचित सम्मान। क्या व्यर्थ थी उनकी कुर्बानी, कुछ बोल मेरे हिंदुस्तान- कुछ बोल मेरे हिंदुस्तान।। थे पहलवान वे,धाकड़-तगड़ा, मन में लिया यह ठान, मार डालुउंगा भारत के गद्दारों को, आजाद करूंगा हिंदुस्तान। ऐसे थे हमारे वीर योद्धा शहीद रामफल मंडल जी महान। Instagram Link ना तो बंदूक उठाया, ना फोड़ा कभी गोला। उसके गड़सा के डंकारसे, अंग्रेजी हुकूमत डोला। हंसकर चुमा फांसी का फंदा, ऊफ तक नहीं बोला। फिर उनके कफन लहरा के बोला, माई रंग दे बसंती चोला। नमस्कार दौस्तों मैं हुंं बिरेन्र्द मंडल धानुक,दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं बिहार के प्रथम शहीद अमर शहीद रामफल मंडल जी के बारे में। जी हां दोस्तों शहीद को असल सम्मान तब जाकर मिलता है जब देश के बच्चा-बच्चा उनकी कुर्बानी को जान जाता हैं, जब उनके कसमे खाया जातें है...

जिंदगी कि हद, रोटी-कपड़ा-मकान पर है। पर हमारे लालच की हद, सातवें आसमान पर है पक्षी की है उतनी दुनिया, वो जितनी ऊंची उड़ान पर है मेरा खुदा जमीन पर है, उसका तो आसमान पर है

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  नेता का मतलब है समाज का नेतृत्व करने वाला मार्गदर्शक ऐसा मार्गदर्शक जिसे समाज की सारी समस्याओं का सही जानकारी हो इतना ही नहीं बल्कि उन समस्याओं का हल करने की भी  क्षमता हो जिसमें यह गुण हैं,वह समाज और देश का सही दिशा दे  सकता है। जिस देश या समाज में ऐसा नेता   होंगे वह देश समाज हमेशा तरक्की करेगा, जिस देश या समाज में ऐसा  नेताओं कि अभावों होंगे,वह देश या समाज समस्याओं से घिरा रहेगा। JOIN MY YOUTUBE CHANNEL ऐसा नहीं है कि हमारे समाज में बुद्धिजीवी लोगों की कमी है बस कमी है एक सच्चे ईमानदार समाज प्रेम देश प्रेम करने वाले सच्चे लीडर का जो आज तक धानुक समाज को नहीं मिला। इसलिए समाज अनेक समस्याओं से गिरा हुआ है। समाज का मार्गदर्शन करना एक गुरु की जिम्मेदारी है, जिसे हर कोई नहीं निभा सकता प्राचीन काल में गुरु की भूमिका पुरोहित लोग निभाते थे ज्ञान का प्रसार करना और राजतंत्र की गहरी रुचि रखते थे और वो पद और प्रतिष्ठा से हमेशा दूर रहते थे। आज का सामाजिक दृश्य कुछ अलग ही है लोग पद और प्रतिष्ठा के लिए किसी हद तक जा सकता है। चाणक्य की नीति सभी जान...

दहेज प्रथा बिहार का अभिश्राप है

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जय धानुक समाज दहेज़ के बारे में लिखना पढ़ना उसे बुरा बताना तो हर कोई चाहता है, पर उसे खत्म करना कोई नहीं चाहता क्यों? जब बात बेटे कि शादी कि हो तो बाप बहुत ही चौरा होकर दहेज मांगता है, और जब देने कि बाड़ी आए तो सर पकर कर रोता हैं। थोड़ा कड़वा है परन्तु १००% सच्च है, अगर किसी को बुड़ा लगे तो छमा प्रार्थी हूं 🙏 खासकर के मिथिलांचल के धानुक भाईयों वो दिन अब ज्यादा दुर नहीं, जब आपको भी अन्य प्रदेशों के तरह, अपने बच्चों के लिए लड़की मिलना बंद हो जाए। आज जिस तरह से गरीबी मां बाप अपने बेटीयों कि सादी UP करने पर मजबुर हैं। हम किसी भी नेता या पार्टी को जानतें हैं या नहीं, उस से पहले क्या हम खुद को जान पायें हैं।  बहुत सारे हमारे आदरणीय समाज सेवक को देखा हुं, facebook whatsapp पर तो समाज सेवा की बात करते हैं, बात जब दहेज लेने की आती है उसे बड़े ही शिद्दत से अंजाम देते हैं, है ना अजीब। जब बच्चे शिक्षित हो जाते हैं तो उसे किसी नेता की पैरवी की जरुरत नहीं पड़ता, वह अपना रास्ता खुद ढूंढ लेते हैं । बस जरुरी है उस स्तर की शिक्षा के जो हमारे समाज में ज्यादा तर घरों में होना मुश्किल है...

अमर शहीद रामफल मंडल पर कविता

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सुनो-सुनो देशवासियों, #शहीद_रामफल_मंडल की अमर कहानी मातृभूमि की आजादी के लिए दे दी अपनी कुर्बानी।।                     हमसे फेसबुक पर जुड़े   06 अगस्त 1924 को धानुक वंश में जन्म लिया माता पिता ने अपने पुत्र का रामफल मंडल नाम दिया। मां गरबी घर खुशियां छाई पिता गोखुल घर आई बधाई। मधुरापुर सीतामढ़ी की मान बड़ाई बिहार वासियों की शान बढ़ाई। रूप मनोहर श्यामली सूरत लगता जैसे कृष्णा की मूरत। भारत सपूत वीर रामफल की जीवन गाथा ध्यान लगाकर सुनो कहानी। मातृभूमि की आजादी के खातिर दे दी अपनी कुर्बानी। शहीद रामफल मंडल थे चार भाई सभी भाइयों में असीम प्यार एक दूसरे पर थी इनायत ना कोई शिकवा ना शिकायत। बचपन बीता खेल कूद में, चलंत स्कूल में शिक्षा पायी, आगे पढ़ने की सुविधा ना देख, कुश्ती लड़ने में ध्यान लगायी पढ़ना छोड़ गया अखाड़ा करने लगा पहलबानी। मातृभूमि की आजादी के लिए दे दी अपनी कुर्बानी।। 08  अगस्त 1942 को अखिल भारतीय, काँग्रेस अधिवेशन, देश नेतृत्व का सर्वसम्मति से, गाँधी जी को मिला समर्थन। अबुल कलाम...

धानुक समाज की प्रकृति

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बिना समाज विकास के आप जीत की कामना नही कर सकते विकास ही नही और भी बहुत सारे मुद्दे है। अब वह दिन दुर नही जब बिहार मे भी पताका फहरायेगा धानुक समाज का, लेकिन अभी इसकी पहल कहा जाय तो बेमानी होगी हमारे अपने बिहार मे अपनी जाती के बहुत नेता हुए उन्होने धानुक जाती का नाम ले कर भवसागर पार कर ली परन्तु हमे सागर मे ही छोड़ दिया। जिसका परिणाम यह हुआ की आज हमे इतना संघर्ष करना पर रहा है मैं अभी भी कहना चाहता हूँ की इस लड़ाई को राजनिति की बली नही चढ़ने देगे इसका ध्यान रखना होगा। यह लड़ाई एक पारम्पपरिक लड़ाई है नेतृत्व की बात की जाये तो पहल कही ना कही से तो करनी होगी और जो भी पहल कर रहे है उन पर हमे विस्वास की डोर जमाये रखनी होगी चाहे नेतृत्व आप करे या हम। अपने बिहार मे ही अभी तीन संगठन काम कर रहा है लेकिन सबका उदेश्य एक ही है। लेकीन जब उनसे हमने बात की तो सब की अपनी राय है। सब एक दुसरे पर दोषारोपन ही कर रहे है क्या यह उचित है जब धारा एक है तो हम सभी विपरित धारा में क्यो बह रहे है, और इसका मुल कारण है आपसी विश्वास की कमी। इसीलिए मैं कहता हूँ पहले हमे एक दुसरे पर विस्वास करना सीखना होगा। हम...

राजा धनक कि कहानी

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Join my facebook peg राजा धनक के चार पुत्र थे (1)कृतवीर्य (2)कृतग्नि (3)कृतवर्मा (4)कृतौजा। इनमें से बड़े पृतवीर्य को राजगद्दी मिली शेस-3 पुत्र के बारे में धार्मिक ग्रंथ मौन है। इनके बारे में किसी भी ग्रंथ में उल्लेख प्राप्त नहीं होता है। संभवत इन तीनों राजकुमारों ने अपने पृथक् राज्य की स्थापना कर राज्य शासन चलाया कहीं-कहीं पढ़ने को मिलता है कि राजा धनक के पुत्रों ने हिमाचल तक अपने राज्य का विस्तार किया था उन तीनों युवराज का क्या हुआ क्या वह अपने भाइयों के अधीन कार्य करते थे अथवा उनको अलग से राज्य देकर दूसरे राज्य में भेज दिया गया अथवा उन्हें समाप्त कर दिया गया जैसे प्राचीन काल में प्रथा थी कि बड़े बेटे को राज गद्दी शौप कर राजा बन प्रस्थान में चले जाते थे यह संभव है कि राजा धनक ने अपना राज्य अपने लड़के को  शौपकर वन प्रस्थान में चले गए और ईश्वर की तपस्या में लीन हो गए वहां पर भगवान शंकर ने प्रसन्न होकर उन्हें शक्ति प्रदान की और वह शक्ति थी धनुष बान। यह शक्ति राजा धनक द्वारा अपने शेष पुत्रों को दे दी गई इन पुत्रों ने अपने पिता राजा धनक के नाम पर अपना पृथक से धनक वंश चलाया किंतु वे अ...

विर धानुक समाज

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ताम्रपत्रों, शिलालेखों से एवं अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों से प्रमाणित होता है कि धानुक वीर धनुर्धर जाति रही है, जो कि सेना के अग्र भाग में चलती थी। युद्ध जीतने के लिये जहाँ-जहाँ राजा गए वहाँ पर इस जाति के लोग गए और उन्होंने वहि अपना निवास बना लिया। भारतीय इतिहास में पानीपत में तीन युद्ध हुवा हैं। तीसरे युद्ध  में दक्षिण से सेना  उत्तर की और गई है। तीसरा पानीपर का युद्ध 1726 में हुवा,  जिसमें दक्षिण से पेशवाओं ने अपनी सम्पुर्ण सेना लेकर उत्तर में आक्रमण किया और वे हार गए।ऐसे में वीर धनुर्धर धानुक सैनिक उत्तर में  जाकर बस गए

धानुक समाज? धानुक दर्पण किताब

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कुंवारी लड़कियों को प्रताड़ित करके देती थी मौत

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महारानी एलिज़ाबेथ बाथरी को इतिहास की सबसे खतरनाक और वहशी महिला सीरियल किलर के तौर पर जाना जाता है। जिसने 1585 से 1610 के दौरान, अपनी जवानी को बरकरार रखने के लिए अपने महल में 600 से ज्यादा लड़कियों की हत्या कर उनके खून से स्नान किया। #कौन_थी_एलिजाबेथ_बाथरी : एलिजाबेथ बाथरी हंगरी साम्राज्य के ऊंचे रसूख वाले बाथरी परिवार से ताल्लुक रखती थी। उसकी शादी फेरेंक नैडेस्‍डी नाम के शख्‍स से हुई थी और वह तुर्कों के खिलाफ युद्ध में हंगरी का राष्‍ट्रीय हीरो था। जब तक वह जिंदा था तब भी एलिजाबेथ लड़कियों को अपना शिकार बनाती थी, लेकिन 1604 में पति की मौत के बाद उसके जुर्म की इंतिहा हो गई थी। एलिजाबेथ बाथरी स्‍लोवानिया के चास्चिस स्थित अपने महल में रहती थी तथा उसने वही सारी घटनाओं को अंजाम दिया था। #कुंवारी_लड़कियों_को_प्रताड़ित_करके_देती_थी_मौत : एलिजाबेथ बाथरी के दिमाग में यह फितूर था की यदि वो कमसिन कुंवारी लड़कियों के खून से स्नान करेगी तो सदैव जवान बानी रहेगी। उसके इसी फितूर ने उसको दुनिया की नंबर एक सीरियल किलर बना दिया। उसके इस काम में उसके तीन नौकर भी उसका साथ देते थे। चुकी वी एक ऊंचे रस...

जिनके पुर्वज नाक कटवा लीया व आज संविधान बदलने का बात करता है

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क्या संविधान लिखकर वाकई कोई कारनामा किया था बाबा साहेब ने? चलो इसबार सच्चाई जान लेते हैं। 1895 में पहली बार बाल गंगाधर तिलक ने संविधान लिखा था अब इससे ज्यादा मैं इस संविधान पर न ही बोलूँ वह ज्यादा बेहतर है, फिर 1922 में गांधीजी ने संविधान की मांग उठाई,  मोती लाल नेहरू, मोहम्मद अली जिन्ना और पटेल-नेहरू तक न जाने किन किन ने और कितने संविधान पेश किये । ये आपस् में ही एक प्रारूप बनाता तो दूसरा फाड़ देता, दुसरा बनाता तो तीसरा फाड़ देता और  इस तरह 50 वर्षों में कोई भी व्यक्ति भारत का एक (संविधान) का प्रारूप ब्रिटिश सरकार के सम्पक्ष पेश नही कर सके। उससे भी मजे की बात कि संविधान न अंग्रेजों को बनाने दिया और न खुद बना सके। अंग्रेजों पर यह आरोप लगाते कि तुम संविधान बनाएंगे तो उसे हम आजादी के नजरिये से स्वीकार कैसे करें। बात भी सत्य थी लेकिन भारत के किसी भी व्यक्ति को यह मालूम नही था कि इतने बड़े देश का संविधान कैसे होगा और उसमे क्या क्या चीजें होंगी? लोकतंत्र कैसा होगा? कार्यपालिका कैसी होगी? न्यायपालिका कैसी होगी? समाज को क्या अधिकार, कर्तव्य और हक होंगे आदि आदि.. अंग्रेज भारत छ...

अगर हम हिन्दु हैं तो तिवारी,दुबे,मिश्रा,सिंह,पटेल,गुप्ता , कुशवाहा,मौर्या,राम,निषाद लिखने की क्या जरुरत है...

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 अतिआवश्यक जानकारी ----------------------------------------    अगर हम हिन्दु हैं तो तिवारी, दुबे, मिश्रा, सिंह, पटेल, गुप्ता, कुशवाहा, मौर्य, राम, निषाद लेखन की क्या आवश्यकता है ...     सब का टाईटल हटा कर केवल हिन्दु कर दो और सब का तुमस में रोटी बेटी का संम्बन्ध स्थापित करो    केवल शुद्र में 6743 जातियां क्यों है ...   चुनाव के समय, हिन्दू मुस्लिम के बीच लड़ाई के समय हम हिन्दु और बाकि समय हरे चमरा, हरे दुःधा, हरे अहिरा, हरे नरिया क्यों ...?     # अपने_आपको_पहचानिए     1. संविधान के अनुच्छेद -340 के अनुसार सभी ओबीसी हिंदू नहीं हैं।       2. संविधान के अनुच्छेद- 341 के अनुसार सभी एससी हिन्दू नहीं हैं।        3. संविधान के अनुच्छेद -342 के अनुसार सभी एसटी हिन्दू नहीं हैं।       4. तो फिर ओबीसी, एससी और एसटी क्या हैं?        उत्तर: - ये इस भारत देश के मूल निवासियों हैं।       5. फिर हिंदू कौन हैं?        सवर्ण भी अपने ...

आदिमानव की उत्पत्ति

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डॉ. वाकणकर ने नर्मदा उत्पत्ति के संबंध में लिखा है कि 10 से 20 लाख वर्ष पूर्व एक प्राणी सीधा खड़े होने में असमर्थ था शायद यही आदिमानव था, जिसे रामापियेकस नाम दिया गया। इस आदि मानव द्वारा निर्मित वस्तुएं रामगढ़ मटक्का दो खेड़ीनाला को शुरू नाला (मप्रदेश) आदि में पाई गई है। सभी स्थान नर्मदा किनारे स्थित है। प्रारंभिक काल में युद्ध सामग्री को अनुकूल कहा गया है, क्योंकि अनुकूल नामक स्थान पर इसका वैज्ञानिक परिलक्षण हुआ है। इस आदिमानव ने अपनी आत्मरक्षा एवं शिकार हेतु भाले (अनुकूल),अश्म कुदाल, अश्म परसु, तक्ष्णक का निर्माण किया, जो नर्मदा किनारे खुदाई में पाई गई है। जिसके आधार पर इन्हें दो काल में विभत्त  किया गया है- (१) 10 से 30 लाख वर्ष के मध्य इनकी बनावट मोटी और बड़े चकतियों के समान होती थी। (२) 3 से 1लाख वर्ष के मध्य बड़े, पतले, सुद्दढ़ उपकरण बनाए जाते थे।भीम बैटिका भोपाल के पास या शस्त्र पाए गए हैं एवं इनको चट्टानों पर चित्रित किए गए हैं। 70हजार से 1लाख वर्ष पूर्व भारत के में यूरोप के समान निअंडोल जाती का मानक पाया जाता था। जर्मनी के निअंडोल नामा का स्थान पर इसका अव...

धानुक जाति के लोगों की जिंदगी बदहाल

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धानुक जाति के लोगों की जिंदगी बदहाल  बड़हरिया:- सामाजिक संरचना में अहम भूमिका निभानेवाली कुछ जातियां सरकार की तमाम कवायदाें व कोशिशों के बावजूद आज तक विकास की मुख्यधारा में नहीं जुड़ पायी हैं. इन्हीं जातियों में शामिल है-धानुक जाति। इस जाति का पुश्तैनी पेशा सुतली काटना और उससे रस्सी बनाना है। लेकिन बदलते दौर ने धानुक जाति से उनका पैतृक पेशा छीन लिया है।दरअसल खेती के कार्यो में बैल की जगह ट्रैक्टर ने ले ली व कृषि कार्यों के लिए रस्सी, पगहा, गलजोरी, बरही आदि की जरूरत खत्म हो गयी। इतना ही नहीं पटसन की रस्सी की जगह प्लाॅस्टिक की रस्सी आ गयी। इस प्रकार समाज में बड़ी भूमिका निभानेवाली धानुक जाति हाशिये पर चली गयी। प्रखंड की चौकी हसन पंचायत के धानुक टोला 100 घर व रसूलपुर पंचायत के रसूलपुर गांव में करीब 40 घर धानुक जाति के लोग रहते हैं। पलानी के घर व नंग-धड़ंग बच्चों को देख कर इनकी बस्ती का अंदाजा सहजता से लगाया जा सकता है। रसुलपुर धानुक बस्ती के अधिकतर धानुक लोगों को आज तक पक्का मकान नसीब नहीं हो पाया है। यूं कहें कि यह जाति सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षणिक व आर्थिक दृष्टि से आज...

माँ को बनाकर खुदा बेरोजगार हो गया

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मैं मानता हूं कि मेरे blogger के कैटेगरी के हिसाब से यह लेख मैच नहीं खाता है, पर क्या करें दोस्तों मां के आगे तो सारा कायनात झुक जाता है। एक माँ रहती है मेरे मंदिर जैसे घर में, और दूसरी मां का आगमन हो चुका है पूरे हिंदुस्तान भर में। #जय_माता_दी खुदा ने कुरान ए शरीफ में,भगवान राम जी रामायण मे, भगवान श्रीकृष्ण जी ने द्वापर युग में, माँ कि प्यार कि कुछ ऐसी मिसाल दि है, उठाके जन्नत और स्वर्ग माँ के कदमो में डाल दि हैं। कौन हो तुम इस कदर नाजुक हो जो हाथ लगाने से बिखर जाती हो, और इस कदर मजबूत हो जो पर्वत को चीर कर नदियों के तरह गुजर जाती हो। तुम्हारी आवाज इतनी मध्यम है कि वक्त को भी लोरिया गाकर सुला दे, और यही आवाज जब औलाद के हक के लिए गूंज उठे तो चट्टान जैसे मुश्किलों को तिनके की तरह उड़ा दे। ऐसी कोई ठोकर ना बन सकी जो तुम्हें गिरा दें, फिर भी रोज हाथों से गिरती हो दुआओं की तरह, धूप जैसे तपते हौसले हैं तुम्हारे और खुद नजर आती हो छांव की तरह। पहचान गया मैं तुम्हें, जान गया तुम कौन हो तुम,किसी मंदिर से उठती हुई लोवान का धुआं हो तुम, किसी मस्जिद से आती हुई सवेरे कि  आज...

भारत का प्रथम शहीद तिलका मांझी India's first martyr Tilka Manjhi

https://youtu.be/KsymuBkfAAs

भारत का प्रथम शहीद तिलका मांझी उर्फ जबड़ा पहरीया

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दोस्तों आज मैं भारत के प्रथम आदि विद्रोही प्रथम शहीद तिलका मांझी उर्फ जबरा पहाड़िया जी के बारे में। बात करने वाला हुं। यहां देखें क्या हूवा चौक गयें, भाई चौंकिये नहीं, मेरे साथ भी ऐसा हि हुवा था, बचपन से सुना था कि हमारे देश का प्रथम बिद्रोही शहीद मंगल पांडेय जी हैं, दोस्तों मंगल पांडेय जी हमसभी भारतीयों के लिये अपने प्राणो कि आहुति दिया हैं, मैं बिरेन्द्र मंडल उनके चरन कमलो में कोटि-कोटि नमन करता हुं। और ना हि मेरा मंसा किसि भी शहीद कि शहादत को माप तोल करना हैं, बस देश और समाज के सामने इतिहास के कुछ धुंधला पन्नों का उजागर करना हैं, इस मकसद से इस चाइनल का निर्माण भी हुवा है। किसि ने क्या खुब लिखा हैं दोस्तों पूजे न शहीद गए तो फिर, यह पंथ कौन अपनाएगा ? तोपों के मुँह से कौन अकड़ अपनी छातियाँ अड़ाएगा ? चूमेगा फन्दे कौन, गोलियाँ कौन वक्ष पर खाएगा ? अपने हाथों अपने मस्तक फिर आगे कौन बढ़ाएगा ? पूजे न शहीद गए तो फिर आजादी कौन बचाएगा ? फिर कौन मौत की छाया में जीवन के रास रचाएगा ? पूजे न शहीद गए तो फिर यह बीज कहाँ से आएगा ? धरती को माँ कह कर, मिट्टी माथे से कौन लगाएगा ?...

शिक्षा जीवन के सभी चुनौतियों को पार कर सकता है

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शिक्षा वो यंत्र है, जो हमारे जीवन की सभी चुनौतियों और खुशियों के बारे में हमारे सभी संदेहों और डर को मिटाने में मदद करती है। ये वो यंत्र है जो हमें खुश और शान्तिप्रिय बनाने के साथ ही बेहतर सामाजिक मनुष्य बनाती है। हमारे अध्यापक हमारे लिए भगवान के समान है, जो शैक्षिक संस्थानों के माध्यम से हमें अच्छे स्तर की शिक्षा प्रदान करने में हमारी सहायता करते हैं। वो हमें सबकुछ सिखाने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए अपने सबसे अच्छे प्रयास करते हैं। हमारे शिक्षक हमारे जीवन से अंधकार, भय, सभी संदेहों को मिटाने और इस बड़े संसार में खूबसूरत भविष्य बनाने में मदद करने के लिए आते हैं। शिक्षा केवल ज्ञानार्जन करना नहीं है हालांकि, इसका अर्थ खुश रहने, दूसरों को खुश करने, समाज में रहने, चुनौतियों का सामना करने, दूसरों की मदद करने, बड़ों की देखभाल करने, दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करने आदि के तरीकों को सीखना है। मेरे प्यारे मित्रों, शिक्षा एक स्वस्थ्य भोजन की तरह है जो हमें आन्तरिक और बाहरी दोनों तरीके से पोषित करती है। ये हमें आन्तरिक रुप से मजबूत बनाती है और हमारे व्यक्तित्व के निर...